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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 74
खे गतिस्तस्य जायेत संतताभ्यासयोगतः। सदा बुद्धिमता भाव्यं योगिना योगसिद्धये ॥
आकाश मार्ग से गमन कर सकना आदि सिद्धियाँ प्रकट होने लगती हैं। बुद्धिमान् श्रेष्ठ योगी सदैव योग की सिद्धि की ओर ही ध्यान बनाये रखे।
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