एवं ज्ञानेन्द्रियाणां तु तत्तदात्मनि धारयेत्।
याममात्रं प्रतिदिनं योगी यत्त्रादतन्द्रितः ॥
इसी तरह से ज्ञानेन्द्रियों के जितने भी विषय हैं, उन सबको योगी अपनी अन्तरात्मा में धारण करे तथा प्रतिदिन एक प्रहर तक इस (क्रिया) का आलस्य त्यागकर प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करे।
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