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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 67
एकवारं प्रतिदिनं कुर्यात्केवलकुम्भकम्। इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यो यत्प्रत्याहरणं स्फुटम् ॥
दिन में एक बार ही 'केवल-कुम्भक' करे एवं कुम्भक में स्थिर होकर इन्द्रियों को उनके विषयों से खींचकर लाये,
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