मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 61
वर्जयित्वा स्त्रियाः सङ्गं कुर्यादभ्यासमादरात्। योगिनोऽङ्गे सुगन्धश्च जायते बिन्दुधारणात् ॥
अतः स्त्रियों का चिन्तन न करके दृढ़ निश्चयी होकर, निरन्तर अभ्यास करते रहना चाहिए। वीर्य को धारण करने से योगी के शरीर से सुगन्ध आने लगती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगतत्त्व के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

योगतत्त्व के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें