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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 57
एतानि सर्वथा तस्य न जायन्ते ततः परम्। ततोऽधिकतराभ्यासाद्वलमुत्पद्यते बहु ॥
निरन्तर अभ्यास बढ़ाने से उसे बहुत बड़ी शक्ति मिल जाती है।
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