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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 56
अल्पमूत्रपुरीषश्च स्वल्पनिद्रश्च जायते। कीलवो दूषिका लाला स्वेददुर्गन्धतानने ॥
योगी का मल-मूत्र अति न्यून हो जाता है तथा निद्रा भी घट जाती है। कीचड़, नाक, चूक, पसीना, मुख की दुर्गन्ध आदि योगी को नहीं होती तथा
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