न तस्य दुर्लभं किंचित्त्रिषु लोकेषु विद्यते।
प्रस्वेदो जायते पूर्व मर्दनं तेन कारयेत् ॥
(ऐसा कर लेने के बाद) फिर उस (श्रेष्ठ) योगी के लिए तीनों लोकों में कभी कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता। अभ्यास के समय जो पसीना निकले, उसे अपने शरीर में ही मल लेना चाहिए।
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