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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 49
यथेष्टधारणाद्वायोः सिध्येत्केवलकुम्भकः । केवले कुम्भके सिद्धे रेचपूरविवर्जिते ॥
यथेष्ट वायु धारण कर सकने के उपरान्त 'केवल कुम्भक' सिद्ध हो जाता है और तब रेचक और पूरक का परित्याग कर देना चाहिए।
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