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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 48
गोधूममुद्रशाल्यन्त्रं योगवृद्धिकरं विदुः । ततः परं यथेष्टं तु शक्तः स्याद्वायुधारणे ॥
गेहूँ, मूँग एवं चावल का भोजन योग में वृद्धि प्रदान करने वाला बतलाया गया है। इस प्रकार अभ्यास करने से वायु को इच्छानुसार धारण करने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।
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