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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 39
जानु प्रदक्षिणीकृत्य न द्रुतं न विलम्बितम्। अङ्गुलिस्फोटनं कुर्यात्सा मात्रा परिगीयते ॥
न तो अत्यन्त द्रुतगति से और न ही अत्यन्त धीमी गति से, वरन् सहज-सामान्य गति से जानु की प्रदक्षिणा करके एक चुटकी बजाए, इतने समय को एक मात्रा कहा जाता है।
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