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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 37
निरुध्य पूरयेद्वायुमिड्या तु शनैः शनैः। यथाशक्त्यविरोधेन ततः कुर्याच्च कुम्भकम् ॥
शनैः शनैः वायु को भीतर की ओर खींचे तथा उसे यथा शक्ति रोककर कुम्भक करे।
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