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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 36
ऋजुकायः प्राञ्जलिश्च प्रणमेदिष्टदेवताम्। ततो दक्षिणहस्तस्य अङ्गुष्ठेनैव पिङ्गलाम् ॥
शरीर को सीधा रखकर, हाथ जोड़ते हुए इष्ट देवता को प्रणाम करे, तत्पश्चात् दाँयें हाथ के अँगूठे से पिंगला को दबाकर
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