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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 34
दिने दिने च संमृष्टं संमार्जन्या विशेषतः । वासितं च सुगन्धेन धूपितं गुग्गुलादिभिः ॥
प्रतिदिन उस (कुटिया) को झाड़-बुहार करके स्वच्छ करता रहे एवं साथ ही उसे धूप, गूगल आदि की धूनी देकर सुवासित भी करता रहे।
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