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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 33
सुष्ठु लिप्तं गोमयेन सुधया वा प्रयत्नतः । मत्कुणैर्मशकैलूतैर्वर्जितं च प्रयत्रतः ॥
तत्पश्चात् उस कुटी को गाय के गोबर से लोपकर शोभनीय बनाये तथा ठीक तरह से स्वच्छ करे और प्रयत्नपूर्वक खटमल, मच्छर, मकड़ी आदि जीवों से रहित करे।
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