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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 32
प्राणायामं ततः कुर्यात्पद्मासनगतः स्वयम्। सुशोभनं मठं कुर्यात्सूक्ष्मद्वारं तु निर्वणम् ॥
तदनन्तर उस श्रेष्ठ साधक को प‌द्मासन लगाकर प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले एक छोटी-सी पर्णकुटी छोटे द्वार से युक्त तथा बिना छिद्र वाली विनिर्मित करे।
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