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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 25
प्रत्याहारो धारणा च ध्यानं भ्रूमध्यमे हरिम्। समाधिः समतावस्था साष्टाङ्गो योग उच्यते ॥
प्रत्याहार, धारणा, भृकुटी के मध्य में श्रीहरि का ध्यान तथा समाधि साम्यावस्था को अष्टांग योग कहते हैं।
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