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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 21
एतेषां लक्षणं ब्रह्मन्वक्ष्ये श्रृणु समासतः । मातृकादियुतं मन्त्रं द्वादशाब्दं तु यो जपेत् ॥
इन (चारों अवस्थाओं) के लक्षण संक्षेप में वर्णित किये जाते हैं - (मन्त्रयोग) जो मातृका आदि से युक्त मन्त्र को बारह वर्ष जप करता है,
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