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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 20
आरम्भश्च घटश्चैव तथा परिचयः स्मृतः। निष्पत्तिश्चेत्यवस्था च सर्वत्र परिकीर्तिता ॥
योग की चार अवस्थायें सर्वत्र वर्णित की गई हैं। ये अवस्थायें आरम्भ, घट, परिचय एवं निष्पत्ति हैं।
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