उत्पत्तिस्थितिसंहारस्फूर्तिज्ञानविवर्जितम्।
एतञ्जानमिति प्रोक्तमथ योगं ब्रवीमि ते ॥
अब इसके आगे योग के सन्दर्भ में वर्णन करते हैं।
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