योगो हि ज्ञानहीनस्तु न क्षमो मोक्षकर्मणि।
तस्माञ्जानं च योगं च मुमुक्षुर्दृढमभ्यसेत् ॥
ज्ञानरहित योग से भी मोक्ष नहीं प्राप्त हो सकता। इस कारण मोक्ष के अभिलाषी को ज्ञान और योग दोनों का ही दृढ़ अभ्यास करना चाहिए।
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