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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 139
लभते योगयुक्तात्मा पुरुषस्तत्परं पदम् । कूर्मः स्वपाणिपादादिशिरश्चात्मनि धारयेत् ॥
इस प्रकार योग से संयुक्त हुआ योगी पुरुष मुक्तावस्था को प्राप्त कर लेता है। जिस तरह से कच्छप अपने हाथ, पैर एवं सिर को अपने अन्दर प्रतिष्ठित कर लेता है,
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