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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 136
तिलमध्ये यथा तैलं पाषाणेष्विव काञ्चनम्। हृदि स्थाने स्थितं पद्म तस्य वक्त्रमधोमुखम् ॥
तिलों में तेल उत्पन्न होता है और प्रस्तर खण्ड में स्वर्ण निहित है, वैसे ही वह भी सभी में व्याप्त है। हृदय संस्थान में जो कमल पुष्प स्थित है, उसका मुख नीचे की ओर है एवं
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