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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 134
त्रयोऽग्रयश्च त्रिगुणाः स्थिताः सर्वे त्रयाक्षरे। त्रयाणामक्षराणां च योऽधीतेऽप्यर्थमक्षरम् ।।
तीन अग्नि हैं, तीन गुण (सत्, रज, तम) बतलाये गये हैं तथा तीन अक्षरों में सभी कुछ विद्यमान है। अतः इन तीन अक्षरों तथा अर्धाक्षर का भी योगी को अध्ययन करना चाहिए।
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