यस्माज्जातो भगात्पूर्व तस्मिन्नेव भगे रमन्।
या माता सा पुनर्भार्या या भार्या मातरेव हि ॥
(जीव ने) जिस योनि में जन्म लिया था, वैसी ही योनि में पुनः पुनः रमण किया करता है। एक जन्म में जो माँ होती है, वही दूसरे जन्म में पत्नी भी हो जाती है तथा जो पत्नी होती है, वह माता बन जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगतत्त्व के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
योगतत्त्व के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।