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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 131
यस्माज्जातो भगात्पूर्व तस्मिन्नेव भगे रमन्। या माता सा पुनर्भार्या या भार्या मातरेव हि ॥
(जीव ने) जिस योनि में जन्म लिया था, वैसी ही योनि में पुनः पुनः रमण किया करता है। एक जन्म में जो माँ होती है, वही दूसरे जन्म में पत्नी भी हो जाती है तथा जो पत्नी होती है, वह माता बन जाती है।
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