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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 129
तदा विवेकवैराग्यं जायते योगिनो ध्रुवम्। विष्णुर्नाम महायोगी महाभूतो महातपाः ॥
उसे निश्चय ही वैराग्य एवं विवेक की प्राप्ति सहजतया हो जाती है। भगवान् विष्णु ही महायोगी, महाभूत स्वरूप तथा महान् तपस्वी हैं।
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