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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 123
अल्पाहारो यदि भवेदग्निर्देहं हरेत्क्षणात् । अधः शिरश्चोर्ध्वपादः क्षणं स्यात्प्रथमे दिने ॥
यदि साधक कम भोजन ग्रहण करेगा, तो उसकी जठराग्नि उसके शरीर को ही नष्ट करने लगेगी। इस मुद्रा के लिए प्रथम दिन क्षणभर के लिए सिर नीचे की ओर करके तथा पैरों को ऊपर की ओर करे।
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