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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 119
उड्डयानाख्यो हि बन्धोऽयं योगिभिः समुदाहृतः। पाष्णिभागेन संपीड्य योनिमाकुञ्चयेदृढम् ॥
उसे योगी लोग उड़ियान बन्ध कहते हैं। एड़ी से योनि स्थान को ठीक प्रकार से दबाकर अन्दर की तरफ खींचे,
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