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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 108
सर्वलोकेषु विहरन्नणिमादिगुणान्वितः । कदाचित्स्वेच्छया देवों भूत्वा स्वर्गे महीयते ॥
अणिमा आदि समस्त सिद्धियों से युक्त हो सभी लोकों में गमन कर सकता है तथा यदि चाहे तो कभी भी देवता होकर स्वर्ग में निवास कर सकता है।
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