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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 100
सर्वायुधैर्धृताकारं सर्वभूषणभूषितम्। उमार्धदेहं वरदं सर्वकारणकारणम् ॥
वे भगवान् शिव सभी प्रकार के शस्त्रास्त्रों को धारण किये हुए, विभिन्न प्रकार के आभूषणों से विभूषित, पार्वती जी से सुशोभित अर्धाङ्ग वाले, वर प्रदान करने वाले तथा सभी कारणों के भी कारण रूप हैं।
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