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योगतत्त्व • अध्याय 1 • श्लोक 10
वारिवत्स्फुरितं तस्मिंस्तत्राहंकृतिरुत्थिता। पञ्चात्मकमभूत्पिण्डं धातुबद्धं गुणात्मकम् ॥
उस परमात्म तत्त्व में जल के सदृश स्फुरण हुआ और उसमें अहंकार की उत्पत्ति हुई। तब पञ्च महाभूत रूप, धातु से आबद्ध, गुणात्मक पिण्ड उत्पन्न हुआ।
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