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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 9
जातिदेशकालव्यवहितानामप्यानन्तर्यं‌ ‌स्मृतिसंस्कारयोरेकरूपत्वात्‌ ‌॥ जाति-देश-काल-व्यहितानाम्-अपि-‌आनन्तर्यम् ,स्मृति-संस्कारयो:-एकरूपत्वात् ॥
स्मृति और संस्कार की एकरूपता होने के कारण जाति , स्थान, व काल से बाधित होने पर भी वासनाएं प्रकट हो जाती हैं ।
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