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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 8
ततस्तद्विपाकानुगुणानामेवाभिव्यक्तिर्वासनानाम्‌ ‌॥ ततः-तत्-विपाक-अनुगुणानाम्-एव-अभिव्यक्ति: वासनानाम् ॥
योगी से भिन्न व्यक्ति के अन्य तीन प्रकार के कार्य होते हैं , उन फलोन्मुख कर्मों के भोगों के अनुरूप ही वासनाओं या संस्कारों की अभिव्यक्ति होती है ।
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