मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 34
‌‌पुरुषार्थशून्यानां‌ ‌गुणानां‌ ‌प्रतिप्रसवः‌ ‌कैवल्यं‌ ‌स्वरूपप्रतिष्ठा‌ ‌वा‌ ‌चितिशक्तिरिति‌ ‌॥ ‌ पुरुषार्थ-शून्यानां,गुणानाम्, प्रतिप्रसव:, कैवल्यं, स्वरुप-प्रतिष्ठा, वा, चिति-शक्ति:, इति ‌॥
इस जीवन के प्रयोजन अथवा लक्ष्य से रहित हुए गुणों का वापिस अपने कारण में लीन हो जाना ही कैवल्य मुक्ति होता है । या आत्मा का अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हो जाना ही मोक्ष कहलाता है ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगसूत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

योगसूत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें