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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 33
क्षणप्रतियोगी‌ ‌परिणामापरान्तनिर्ग्राह्यः‌ ‌क्रमः‌ ‌॥‌ ‌ क्षण-प्रतियोगी, परिणाम-अपरान्त-निर्ग्राह्य:, क्रमः ॥
क्षण के अभाव पूर्वक कार्य के समाप्ति पर्यन्त जो ज्ञात होता है उसे ‘क्रम’ कहते हैं ।
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