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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 32
ततः‌ ‌कृतार्थानां‌ ‌परिणामक्रमसमाप्तिर्गुणानाम्‌ ‌॥
धर्ममेघ समाधि के बाद अपने भोग व अपवर्ग रूपी प्रयोजन को सिद्ध कर चुके गुणों का परिणाम क्रम भी समाप्त हो जाता है।
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