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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 27
‌‌तच्छिद्रेषु‌ ‌प्रत्ययान्तराणि‌ ‌संस्कारेभ्यः‌ ‌॥ ‌ तत्-छिद्रेषु,प्रत्ययान्तराणि,संस्कारेभ्यः‌ ॥
विवेकज्ञान होने के बाद भी बीच बीच में पूर्व जन्म के संचित और बचे हुए संस्कारों के कारण व्युत्थान की स्थिति विवेकज्ञान के साथ आती रहती है ।
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