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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 25
विशेषदर्शिन‌ ‌आत्मभावभावनाविनिवृत्तिः‌ ‌॥ विशेषदर्शिन:,आत्म-भाव-भावना, विनिवृत्ति:॥
ऐसे योगी जिन्हें विशेष ज्ञान प्राप्त हो जाता है, उन्हें स्वयं को जानने की इच्छा की समाप्ति हो जाती है ।
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