वह चित्त अनंत या अनगिनत वासनाओं से चित्रित होने पर भी जीवात्मा के है, क्योंकि संघात स्वभाव होने से वह दूसरों के लिए प्रयोजन सिद्ध करने वाला होता है ।
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