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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 23
द्रष्टृदृश्योपरक्तं‌ ‌चित्तं‌ ‌सर्वार्थम्‌ ‌॥ ‌द्रष्टृ-दृश्य-उपरक्तम्, चित्तं-सर्व-अर्थम् ॥
चित्त का आत्मा -दृष्टा व विषय के साथ सम्बन्ध हो जाने से वह सभी प्रयोजन (भोग एवं अपवर्ग) कि सिद्धि करने वाला हो जाता है ।
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