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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 21
चित्तान्तरदृश्ये‌ ‌बुद्धिबुद्धेरतिप्रसङ्गः‌ ‌स्मृतिसङ्करश्च‌ ‌॥
एक चित्त का दूसरे चित्त से ज्ञान हो जायेगा ऐसा मानने पर दूसरी बुद्धि के कारण उसमें अनवस्था दोष उत्पन्न होता है। तथा सभी स्मृतियों के परस्पर घुल मिल जाने का दोष उत्पन्न हो जायेगा।
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