चित्तान्तरदृश्ये बुद्धिबुद्धेरतिप्रसङ्गः स्मृतिसङ्करश्च ॥
चित्तान्तर-दृश्ये, बुद्धिबुद्धे:,अतिप्रसङ्ग:,स्मृति,संकर:, च ॥
एक चित्त का दूसरे चित्त से ज्ञान हो जायेगा ऐसा मानने पर दूसरी बुद्धि के कारण उसमें अनवस्था दोष उत्पन्न होता है । तथा सभी स्मृतियों के परस्पर घुल मिल जाने का दोष उत्पन्न हो जायेगा ।
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