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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 20
एकसमये‌ ‌चोभयानवधारणम्‌ ‌॥ ‌ एकसमये, च, उभय-अनवधारणम् ॥
और इस प्रकार एक ही समय में एक साथ चित्त व विषय दोनों का बोध या ज्ञान नहीं हो सकता है ।
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