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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 13
ते‌ ‌व्यक्तसूक्ष्मा‌: ‌गुणात्मानः‌ ‌॥‌ ते, व्यक्त-सूक्ष्मा:, गुणात्मान ॥
तीनों कालों में विद्यमान रहने वाले सभी पदार्थ व्यक्त या प्रकट एवं सूक्ष्म रूप से अप्रत्यक्ष गुण रूप से अस्तित्व में रहते हैं ।
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