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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 12
अतीतानागतं‌ ‌स्वरूपतोऽस्त्यध्वभेदाद्धर्माणाम्‌ ‌॥ अतीत-अनागतम् , स्वरूपतः-अस्ति-अध्व-भेदात्-धर्माणाम् ॥
पदार्थों के धर्मों में भेद होने से जिन पदार्थों का काल बीत चुका है और जिन पदार्थो का अभी समय नहीं आया है वे सभी पदार्थ स्वरुप से अस्तित्व में होते ही हैं ।
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