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योगसूत्र • अध्याय 4 • श्लोक 10
तासामनादित्वं‌ ‌चाशिषो‌ ‌नित्यत्वात्‌ ‌॥ तासाम्-अनादित्वं , च-आशिष:,‌नित्यत्वात् ॥
जिजीविषा अर्थात जीवित रहने की इच्छा की सतत विद्यमानता होने से उन वासनाओं या संस्कारों का प्रवाह अनादिकाल से ही निरन्तर चलता रहता है ।
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