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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 9
‌व्युत्थाननिरोधसंस्कारयोरभिभवप्रादुर्भावौ निरोधक्षणचित्तान्वयो निरोधपरिणामः ॥ व्युत्थान, निरोध-संस्कारयो:, अभिभव-प्रादुर्भावौ, निरोध-क्षण-चित्त-अन्वय, निरोध-परिणाम: ॥
चित्त निरोध की अवस्था समय में चित्त व्युत्थान और निरोध इन दोनों ही संस्कारो से संयुक्त होता है। इसे ही चित्त के निरोध का परिणाम कहा गया है।
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