योगी के स्वयं के योग साधना से प्राप्त सामर्थ्य से उत्पन्न होने वाला, जो सभी पदार्थों के विषयों को उनके सभी कालों भूत, वर्तमान व भविष्य को जानने वाला होता है और यह सब बिना किसी क्रम अर्थात विभाग के ही पैदा होने वाला ज्ञान होता है। ऐसे ज्ञान को विवेकज या विवेक से उत्पन्न ज्ञान कहा जाता है।
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