स्थान्युपनिमन्त्रणे सङ्गस्मयाकरणं पुनरनिष्टप्रसङ्गात् ॥
स्थानि-उपनिमन्त्रणे,सङ्ग-स्मय,अकरणम् , पुनः अनिष्ट-प्रसङ्गात् ॥
उच्च स्थान प्राप्त किसी व्यक्ति या कुल के द्वारा निमन्त्रण मिलने पर योगी को राग, अभिमान या अहंकार नहीं करना चाहिए । ऐसा करने से योग मार्ग से पुनः नीचे गिरने का अवसर उपस्थित हो जाता है ।
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