मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 47
ग्रहणस्वरूपास्मितान्वयार्थवत्त्वसंयमादिन्द्रियजयः ॥ ग्रहण-स्वरुप-अस्मिता-अन्वय-अर्थवत्त्व-संयमाद्-इन्द्रियजय:॥
इन्द्रियों की ग्रहण, स्वरूप, अस्मिता, अन्वय व अर्थवत्त्व इन पांच विभागों में संयम करने से योगी सभी इन्द्रियों पर पूर्ण विजय प्राप्त कर लेता है ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगसूत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

योगसूत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें