पञ्च महाभूतों में संयम करने के बाद योगी को ऐश्वर्य स्वरुप रूप, लावण्य, बल एवं सुदृढ़ शरीर रूपी शरीर की संपत्ति प्राप्त होती है। इस सिद्धि को कायसम्पत् नाम से कहा गया है।
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