मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 46
रूपलावण्यबलवज्रसंहननत्वानि कायसम्पत् ॥ रूप-लावण्य-बल-वज्र-संहननत्वानि,कायसम्पत् ॥
पञ्च महाभूतों में संयम करने के बाद योगी को ऐश्वर्य स्वरुप रूप, लावण्य, बल एवं सुदृढ़ शरीर रूपी शरीर की संपत्ति प्राप्त होती है। इस सिद्धि को कायसम्पत् नाम से कहा गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगसूत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

योगसूत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें