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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 45
ततोऽणिमादिप्रादुर्भावः कायसम्पत्तद्धर्मानभिघातश्च ॥ तत:,अणिमादि-प्रादुर्भाव:, काय-सम्पत्,तद् -धर्म ,अनभिघात:, च ॥
पञ्च भूतों पर विजय प्राप्त करने के बाद योगी को अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है ।और शरीर का विशेष सामर्थ्य बढ़ता है और साथ ही पृथ्वी आदि पञ्च भूतों के धर्म योगी को किसी भी प्रकार से बाधा नहीं पहुंचाते हैं ।
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