ततोऽणिमादिप्रादुर्भावः कायसम्पत्तद्धर्मानभिघातश्च ॥
तत:,अणिमादि-प्रादुर्भाव:, काय-सम्पत्,तद् -धर्म ,अनभिघात:, च ॥
पञ्च भूतों पर विजय प्राप्त करने के बाद योगी को अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है ।और शरीर का विशेष सामर्थ्य बढ़ता है और साथ ही पृथ्वी आदि पञ्च भूतों के धर्म योगी को किसी भी प्रकार से बाधा नहीं पहुंचाते हैं ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगसूत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
योगसूत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।